Monday, April 24, 2023

World Book Day विश्व पुस्तक दिवस (23.04.2023)

World Book Day, also known as World Book and Copyright Day or International Day of the Book, is an annual event organized by the United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (UNESCO) to promote readingpublishing, and copyright. The first World Book Day was celebrated on 23 April in 1995, and continues to be recognized on that day. A related event in the United Kingdom and Ireland is observed in March.[1] On the occasion of World Book and Copyright Day, UNESCO along with the advisory committee from the major sectors of the book industry, select the World Book Capital for one year. Each designated World Book Capital City carries out a program of activities to celebrate and promote books and reading.[2]In 2023 Accra, the capital of Ghana was designated as the World Book Capital.

Date selection

The original idea was conceived in 1922 by Vicente Clavel, director of Cervantes publishing house in Barcelona, as a way to honour the author Miguel de Cervantes and boost the sales of books. It was first celebrated on 7 October 1926, Cervantes' birthday, before being moved to his death date, 23 April, in 1930.[4] The celebration continues with great popularity in Catalonia, where it is referred to as Sant Jordi's Day or The Day of Books and Roses.

In 1995, UNESCO decided that the World Book and Copyright Day would be celebrated on 23 April, as the date is also the anniversary of the death of William Shakespeare and Inca Garcilaso de la Vega, as well as that of the birth or death of several other prominent authors.[5] (In a historical coincidence, Shakespeare and Cervantes died on the same date—23 April 1616—but not on the same day, as at the time, Spain used the Gregorian calendar and England used the Julian calendar; Shakespeare actually died 10 days after Cervantes died, on 3 May of the Gregorian calendar.) 

World Book Day is  celebrated in India on 23rd April every year.[14] It is commemorated in many parts of India to encourage & aware of people for reading & publishing books.

विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस का महत्व

World Book and Copyright Day :  दरअसल, वर्ल्ड बुक एंड कॉपीराइट डे हर साल यूनेस्को द्वारा आयोजित किया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य किताबें पढ़ने, लिखने, ट्रांसलेट, पब्लिशिंग और कॉपीराइट के महत्वता को दर्शाना है। यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि 23 अप्रैल विश्व साहित्य में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मिगुएल डे सर्वेंट्स और विलियम शेक्सपियर जैसे प्रमुख लेखकों की इस तिथि को मृत्यु का स्मरण कराता है।

विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस का इतिहास

World Book and Copyright Day :  गौरतलब है कि विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस पहली बार 23 अप्रैल को साल 1995 में मनाया गया था। यूनेस्को (UNESCO) ने इस दिन को खासतौर पर विलियम शेक्सपीयर और मिगुएल सर्वेंटिस जैसे साहित्यकारों को रिस्पेक्ट देने के लिए अप्रैल की 23 तारीख को चुना था।

मालूम हो कि इस दिन को पहली बार साल 1922 में स्पेनिश राइटर विसेंट क्लेव एंड्रेस ने मिगुएल सर्वेंटिस को याद करने और उन्हें सम्मान देने के मकसद से मनाया गया था। जिसके बाद 23 अप्रैल 1995 में पेरिस में आयोजित यूनेस्को के जनरल कॉन्फ्रेंस के लिए एक नेचुरल च्वाइस थी। ताकि इस दिन के माध्यम से लोगों को बुक रीडिंग समेत अन्य चीजों के लिए भी जागरूक किया जा सके।

* The information collected from different sites and used only for educational purpose.


Friday, July 22, 2022

Thursday, June 30, 2022

National Doctor’s Day 2022 (01 JULY 2022)

It's National Doctor's Day. The day is marked to celebrate the health care staff who work day and night to save lives. The world has seen doctors leading from the front, during the COVID 19 outbreak, without compromising on their duties even for a bit. And to express gratitude to the health professionals, National Doctor's Day is celebrated by the Indian Medical Association (IMA), every year, on July 1. It is also the birth and death anniversary of the former chief minister of Bengal, Dr Bidhan Chandra Roy, who was an eminent doctor. Theme Every year, a new theme is allotted to this day. For 2022, the theme for National Doctor's Day is “Family Doctors on the Front Line.” History National Doctor's Day was first celebrated back in the year 1991 with an aim to honour the work of former Chief Minister of Bengal Dr BC Roy. He was a well-known doctor who worked relentlessly to serve society. On February 4, 1961, he was awarded the highest civilian award in the country “Bharat Ratna.” He is known for setting up medical institutions like Jadavpur T.B. Hospital, Victoria Institution (college), and Chittaranjan Cancer Hospital among others. Significance National Doctor's Day is celebrated to mark the role of doctors in society. Doctors work tirelessly just to ensure that the patients remain in good health. This day is a great way to thank the healthcare staff for their dedication and hard work. How is National Doctor's Day celebrated? A number of activities and events are organised at school and college levels to make the students aware of the roles and responsibilities of doctors and healthcare workers.

Wednesday, June 15, 2022

Personality of the Month : Rabindra Nath Tagore

 

इस माह के विशिष्ट व्यक्तित्व - रबीन्द्रनाथ टैगोर ( 161st BIRTH ANNIVERSARY OF "GURUDEV" 07 MAY 2021)

 


गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर का जन्‍म 7 मई सन् 1861 को कोलकाता में हुआ था। रवींद्रनाथ टैगोर एक कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार, और दार्शनिक थे। रवींद्रनाथ टैगोर एशिया के प्रथम व्‍यक्ति थे, जिन्‍हें नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया था।
वे अपने माता-पिता की तेरहवीं संतान थे। बचपन में उन्‍हें प्‍यार से 'रबी' बुलाया जाता था। आठ वर्ष की उम्र में उन्‍होंने अपनी पहली कविता लिखी, सोलह साल की उम्र में उन्‍होंने कहानियां और नाटक लिखना प्रारंभ कर दिया था।

अपने जीवन में उन्‍होंने एक हजार कविताएं, आठ उपन्‍यास, आठ कहानी संग्रह और विभिन्‍न विषयों पर अनेक लेख लिखे।

जीवन के 51 वर्षों तक उनकी सारी उप‍लब्धियां और सफलताएं केवल कोकाता और उसके आसपास के क्षेत्र तक ही सीमित रही। 51 वर्ष की उम्र में वे अपने बेटे के साथ इंग्‍लैंड जा रहे थे। समुद्री मार्ग से भारत से इंग्‍लैंड जाते समय उन्‍होंने अपने कविता संग्रह गीतांजलि का अंग्रेजी अनुवाद करना प्रारंभ किया। गीतांजलि का अनुवाद करने के पीछे उनका कोई उद्देश्‍य नहीं था केवल समय काटने के लिए कुछ करने की गरज से उन्‍होंने गीतांजलि का अनुवाद करना प्रारंभ किया। उन्‍होंने एक नोटबुक में अपने हाथ से गीतांजलि का अंग्रेजी अनुवाद किया।

लंदन में जहाज से उतरते समय उनका पुत्र उस सूटकेस को ही भूल गया जिसमें वह नोटबुक रखी थी। इस ऐतिहासिक कृति की नियति में किसी बंद सूटकेस में लुप्‍त होना नहीं लिखा था। वह सूटकेस जिस व्‍यक्ति को मिला उसने स्‍वयं उस सूटकेस को रवींद्रनाथ टैगोर तक अगले ही दिन पहुंचा दिया।

लंदन में टैगोर के अंग्रेज मित्र चित्रकार रोथेंस्टिन को जब यह पता चला कि गीतांजलि को स्‍वयं रवींद्रनाथ टैगोर ने अनुवादित किया है तो उन्‍होंने उसे पढ़ने की इच्‍छा जाहिर की। गीतांजलि पढ़ने के बाद रोथेंस्टिन उस पर मुग्‍ध हो गए। उन्‍होंने अपने मित्र डब्‍ल्‍यू.बी. यीट्स को गीतांजलि के बारे में बताया और वहीं नोटबुक उन्‍हें भी पढ़ने के लिए दी। इसके बाद जो हुआ वह इतिहास है। यीट्‍स ने स्‍वयं गीतांजलि के अंग्रेजी के मूल संस्‍करण का प्रस्‍तावना लिखा। सितंबर सन् 1912 में गीतांजलि के अंग्रेजी अनुवाद की कुछ सीमित प्रतियां इंडिया सोसायटी के सहयोग से प्रकाशित की गई।
लंदन के साहित्यिक गलियारों में इस किताब की खूब सराहना हुई। जल्‍द ही गीतांजलि के शब्‍द माधुर्य ने संपूर्ण विश्‍व को सम्‍मोहित कर लिया। पहली बार भारतीय मनीषा की झलक पश्चिमी जगत ने देखी। गीतांजलि के प्रकाशित होने के एक साल बाद सन् 1913 में रवींद्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया। टैगोर सिर्फ महान रचनाधर्मी ही नहीं थे, बल्कि वो पहले ऐसे इंसान थे जिन्होंने पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के मध्‍य सेतु बनने का कार्य किया था। टैगोर केवल भारत के ही नहीं समूचे विश्‍व के साहित्‍य, कला और संगीत के एक महान प्रकाश स्‍तंभ हैं, जो स्‍तंभ अनंतकाल तक प्रकाशमान रहेगा।

CLICK TO READ THE LITERATUTE OF RABINDRANATH TAGORE

           


SPECIAL REMEMBERABLE WORKS
Rabindranath Tagore is the only known person who has written the national anthems for three different countries.
 He wrote 'Jana Gana Mana', the national anthem for India,

 'Amar SonarBangla', the national anthem for Bangladesh 

 'Nama Nama Sri Lanka Mata', in Bengali, for Sri Lanka.



      "You cannot cross the sea merely by standing and staring at the water." The famous quote which means that we should not let ourselves indulge in vain wishes has been penned by the Nobel laureate, Rabindranath Tagore

Tuesday, June 7, 2022

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस World Food Safety Day 2021 (07 June 2022)

 

World Food Safety Day 2021 (07 June 2021)

 विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 


7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) मनाया जा रहा है। इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 2018 में खाद्य और कृषि संगठन के सहयोग से अपनाया गया था। इसके बाद पहली बार साल 2019 में इसे मनाया गया था। इस हिसाब से दुनिया 7 जून को तीसरी बार ‘वर्ल्ड फूड सेफ्टी डे’ मनाएगी। डब्लूएचओ (WHO) के अनुसार, इससे फूड सेफ्टी को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाई जा सकती है और विश्व स्तर पर फूड से होने वाली बीमारियों को भी ध्यान में लाया जा सकता है। कृषि द्वारा उगाया जाने वाला अनाज खाद्य पदार्थ व्यर्थ ना हो। क्योंकि विश्व में बहुत से लोग भूखे पेट सोते हैं तो उनकी भूख की पूर्ति के लिए खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है।


World Food Safety Day 2021 theme 

                         "Safe food today for a healthy tomorrow" 

तीसरा विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (डब्ल्यूएफएसडी) 7 जून 2021 को मनाया जाएगा, ताकि खाद्य सुरक्षा, मानव स्वास्थ्य, आर्थिक समृद्धि, कृषि, बाजार पहुंच, पर्यटन में योगदान को रोकने, पता लगाने और प्रबंधन करने में मदद करने के लिए ध्यान आकर्षित किया जा सके। 


इस दिवस को मनाने का उद्देश्य सुरक्षित खाद्य मानकों को बनाए रखने के लिए जागरूकता पैदा करना और खाद्य जनित बीमारियों के कारण होने वाली मौतों को कम करना है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के अनुसार,  जीवन को बनाए रखने और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित और पौष्टिक भोजन जरूरी है।  डब्ल्यूएचओ के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में लगभग 10 में से लगभग 1 लोग दूषित भोजन खाने के बाद बीमार पड़ जाता हैं और यह एक बड़ा खतरा है।

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी दो एजेंसियों – खाद्य और कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization- FAO) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization- WHO) को दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए नामित किया है। इसके अलावा ‘खाद्य सुरक्षा क्यों आवश्यक है और इसे कैसे हासिल किया जा सकता है?’ इस पर चर्चा करने के लिये संयुक्त राष्ट्र ने दिशा-निर्देश विकसित किये हैं। इसके पाँच मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं-

– सरकारों को सभी के लिये सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करना चाहिये।

– कृषि और खाद्य उत्पादन में अच्छी प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता है।

– व्यापार करने वालों लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिये कि खाद्य पदार्थ सुरक्षित है।

– सभी उपभोक्ताओं को सुरक्षित, स्वस्थ और पौष्टिक भोजन प्राप्त करने का अधिकार है।

– खाद्य सुरक्षा हम सबकी एक साझा ज़िम्मेदारी है।

– ‘सुरक्षित, पौष्टिक और पर्याप्त भोजन’ अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ ही भूख जैसी समस्या को समाप्त कर सकता है।

"Good food end with good talk"

"I am a better person when I have less on my plate"

Sunday, June 5, 2022

Fairy tales and story : Rapunzel ( Story for kids)


 

WORLD ENVIRONMENT DAY (05 JUNE)

World Environment Day is celebrated on June 5, annually to encourage awareness and environmental protection. Photo: Shutterstock

ABOUT WORLD ENVIRONMENT DAY

THE THEME

Since 1974, World Environment Day has been celebrated every year on 5 June, engaging governments, businesses and citizens in an effort to address pressing environmental issues.

For too long, we have been exploiting and destroying our planet’s ecosystems. Every three seconds, the world loses enough forest to cover a football pitch and over the last century we have destroyed half of our wetlands. As much as 50 per cent of our coral reefs have already been lost and up to 90 per cent of coral reefs could be lost by 2050, even if global warming is limited to an increase of 1.5°C.

Ecosystem restoration means preventing, halting and reversing this damage – to go from exploiting nature to healing it. This World Environment Day will kick off the UN Decade on Ecosystem Restoration, a global mission to revive billions of hectares, from forests to farmlands, from the top of mountains to the depth of the sea.

Only with healthy ecosystems can we enhance people’s livelihoods, counteract climate change and stop the collapse of biodiversity.


Everybody living on this planet, in this moment in time can be a part of #GenerationRestoration

THE HOST

Every World Environment Day is hosted by a different country in which official celebrations take place. This year's host is Pakistan.\

हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है. इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को देखना है. 

विश्व पर्यावरण दिवस लगभग 100 से भी अधिक देशों के लोगों के द्वारा 5 जून को मनाया जाता है. इसकी घोषणा और स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा 1972 में हुई थी, हालांकि इस कार्यक्रम को हर साल मनाने की शुरुआत 1973 से हुई. इसका वार्षिक कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के द्वारा घोषित की गई विशेष थीम या विषय पर आधारित होता है.

इस अभियान का समारोह प्रत्येक वर्ष अलग-अलग शहरों के द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसके दौरान पूरे सप्ताह अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ लगाई जाती है. इस अभियान के आयोजन के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र लोगों को पर्यावरण के बारे में जागरुकता और प्रोत्साहन को बढ़ावा देता है. यह सकारात्मक सार्वजनिक गतिविधियाँ और राजनीतिक ध्यान प्राप्त करने के लिए प्रभावी वार्षिक अभियान है.

इसे अधिक प्रभावी बनाने और वर्ष की विशेष थीम या विषय के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. विभिन्न क्रियाएं; जैसे- निबंध लेखन, पैराग्राफ लेखन, भाषण, नाटक का आयोजन, सड़क रैलियाँ, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, कला और चित्रकला प्रतियोगिता, परेड, वाद-विवाद, आदि का आयोजन किया जाता है. लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरुकता लाने के लिए अन्य प्रकार की प्रदर्शनियों को भी आयोजित किया जाता है. यह सामान्य जनता सहित शिक्षाविदों, पर्यावरणविदों, प्रोफेसरों, वैज्ञानिकों, राजनीतिज्ञों, आदि के समूहों को आकर्षित करता है.

मेजबान शहर के अलावा विश्व पर्यावरण दिवस वाले दिन, यह अन्य देशों के द्वारा वैयक्तिक रुप से अपने राज्यों, शहरों, घरों, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थलों आदि पर परेडों और सफाई गतिविधियाँ, रीसाइक्लिंग पहल, वृक्षारोपण के साथ सभी प्रकार की हरियाली वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और लोगों को इस खूबसूरत ग्रह की बुरी परिस्थितियों की ओर ध्यान देने के लिए आयोजित किया जाता है. इस दिन सार्वजनिक अवकाश नहीं होता इस प्रकार सभी स्कूल और कार्यालय खुले रहते हैं और कोई भी अवकाश नहीं लेता है.

यह कार्यक्रम इस पृथ्वी की सुन्दरता को बनाए रखने के लिए कुछ सकारात्मक गतिविधियों के लिए एकसाथ कार्य करने की एक पहल है. हमें पूरे सालभर कार्यक्रम के उद्देश्यों को अपने ध्यान में रखना चाहिए और उन्हें वृक्षारोपण के माध्यम से आसपास के वातावरण को सुन्दर बनाने और साफ-सफाई, पानी की बचत, बिजली का कम प्रयोग, जैविक और स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग, जंगली जीवन की सुरक्षा आदि बहुत सी गतिविधियों को कार्यरुप में बदलना चाहिए. जीवन के लिए हमारे पास एकमात्र यही ग्रह है, यह हमारा घर है और हम सभी इसकी प्राकृतिक सुन्दरता को सदैव के लिए बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है.

विश्व पर्यावरण दिवस एक अभियान है, जो प्रत्येक वर्ष 5 जून को, विश्वभर में पर्यावरण के नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है. इस अभियान की शुरुआत करने का उद्देश्य वातावरण की स्थितियों पर ध्यान केन्द्रित करने और हमारे ग्रह पृथ्वी के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण में सकारात्मक बदलाव का भाग बनने के लिए लोगों को प्रेरित करना है.

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

विश्व पर्यावरण दिवस की घोषणा संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मानव पर्यावरण के संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अवसर पर 1972 में हुई थी. हालांकि, यह अभियान सबसे पहले 5 जून 1973 को मनाया गया. यह प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है और इसका कार्यक्रम विशेषरुप से, संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित किए गए वार्षिक विषय पर आधारित होता है.

विश्व पर्यावरण दिवस

यह कार्यक्रम एक शहर के द्वारा आयोजित किया जाता है, जहाँ पर्यावरण से संबंधित विषयों पर चर्चा की जाती है, जिसमें बहुत सी गतिविधियों को शामिल किया जाता है. हमारे वातावरण की सुरक्षा के लिए विश्वभर में लोगों को कुछ सकारात्मक गतिविधियाँ के लिए प्रोत्साहित और जागरुक करने के लिए यह दिन संयुक्त राष्ट्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन है. अब, यह 100 से भी अधिक देशों में लोगों तक पहुँचने के लिए बड़ा वैश्विक मंच बन गया है.

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित की जाने वाली गतिविधियाँ

विश्व पर्यावरण दिवस कार्यक्रम भारत में विशेषरुप से, स्कूलों और कॉलेजों में विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से मनाया जाता है. विद्यार्थियों के मध्य जागरुकता पैदा करने के लिए अध्यापक कुछ प्रभावी कार्यक्रमों के आयोजन की योजना बनाते है; जैसे- निबंध लेखन, भाषण देना, शिक्षा, विषय चर्चा, स्लाइड शो, क्विज प्रतियोगिता, कला प्रतियोगिता, बैनर प्रदर्शन, सेमिनार, संगोष्ठियों, निर्धारित विषय पर कार्यशालाएं, चित्रकला प्रतियोगिता, संबंधित विषय पर व्याख्यान, थीम पर आधारित प्रदर्शन, फिल्मी शो, कथन लेखन, आदि. हमारे वातावरण की सुरक्षा के सन्दर्भ में विद्यार्थियों को सकारात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.


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Theme of 2021



 QUATATIONS RELATED WITH ENVIRONMENT 


"हमारी सुरक्षा, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे ग्रह के लिए बदलाव लाने का हममें साहस और प्रतिबद्धता होनी चाहिए।" ~ बराक ओबामा, अमेरिकी राष्ट्रपति 

"प्रकृति को बुरा-भला न कहो। उसने अपना कर्तव्य पूरा किया, तुम अपना करो।" मिल्टन 

"हमारा पर्यावरण हमारे रवैये और अपेक्षाओं का आइना होता है।"- अर्ल नाइटेंगल

हम चाहे कहीं भी रहे, पर्यावरण की देखभाल करना हमारे लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। छोटे स्तर पर काम शुरू करें। दस या बीस मित्रों के साथ पृथ्वी दिवस मनाएं। अगले वर्ष यह बहुत बड़ा समूह हो जाएगा और उसके बाद यह जागरूकता विश्व भर में फैल जायेगी।पृथ्वी दिवस - 22 अप्रैल 2009
मैं खुश हूँ कि मैं ऐसे भविष्य में युवा नहीं होऊंगा जिसमे जंगल ना हों

हमारी सुरक्षा, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे ग्रह के लिए बदलाव लाने का हममें साहस और प्रतिबद्धता होनी चाहिए


हम चाहे कहीं भी रहे, पर्यावरण की देखभाल करना हमारे लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। छोटे स्तर पर काम शुरू करें। दस या बीस मित्रों के साथ पृथ्वी दिवस मनाएं। अगले वर्ष यह बहुत बड़ा समूह हो जाएगा और उसके बाद यह जागरूकता विश्व भर में फैल जायेगी

प्राणिमात्र की यही पुकार हरा भरा रहे यह संसार

वृक्ष फेलाते हें हरयाली , जीवन में लाते खुशहाली

यदि आप एक जंगल काट देते हैं , तो इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कितनी सॉमिल्स हैं अगर अब पेड़ ही नहीं बचे हैं

तब मानव कवि बन जाता है !
जब उसको संसार रुलाता,
    वह अपनों के समीप जाता,
      पर जब वे भी ठुकरा देते
        वह निज मन के सम्मुख आता,
          पर उसकी दुर्बलता पर जब मन भी उसका मुस्काता है !
            तब मानव कवि बन जाता है !

              हमारा पर्यावरण हमारे रवैये और अपेक्षाओं का आइना होता है

              मत काटो इन पेड़ो को इन में होती हे जान, बिन पेड़ो के हो जायेगा हम सब का जीवन सुनसान

              आओ बच्चो के साथ मनाए त्योहार, स्वस्थ जीवन के लिए दे एक पेड़ उपहार

              खेतों में शहर बसाना, कारखाना लगाना बंद करो

              पर्यावरण बचाओ आंदोलन के शहीदों को सलाम, शहादत की परंपरा को सलाम

              यह भयावह है कि पर्यावरण बचाने के लिए हमें अपनी ही सरकार से लड़ना पड़ता है

              प्रयास करें कि जब आप आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं

              जलवायु परिवर्तन एक भयानक समस्या है, और इसे पूरी तरह से हल करने की आवश्यकता है। यह एक बहुत बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए


              बैठा है यमराज वह पर
              नहीं सुरक्षा है जहा पर
              शुद्ध सुरक्षित उत्पादन प्रक्रिया
              सुरक्षित कार्य की है ये विद्या.
              सुरक्षा से नाता जोड़ो
              असुरक्षित कार्य से मुह मोड़ो



              अमीरों की अमीरी से, कंपनियों की मुनाफाखोरी से पर्यावरण को खतरा है
              "खुदा का शुक्र है कि इंसान उड़ नहीं सकते, और आसमान और धरती दोनों को ही बर्वाद नहीं कर सकते।" ~ हेनरी डेविड थॉरो

              "मानवजाति ने शायद पहले के कुल मानव इतिहास की तुलना में  २० वीं सदी में पृथ्वी को अधिक नुकसान  पहुँचाया है।" ~ जैक्स यवेस कॉस्ट्यो

              "ये समय इलेक्ट्रिक कारों के लिए उपयुक्त है – वास्तव में ये समय बेहद ज़रूरी है।" ~ कार्लोस घोसन

              "आर्थिक लाभ के लिए वर्षावन नष्ट करना कोई भोजन पकाने के लिए किसी रेनेसेन्स पेंटिंग को जलाने की तरह है।" ~ ई ओ विल्सन
              "पक्षी पर्यावरण के संकेतक हैं। यदि वे खतरे में हैं तो हम जानते हैं कि हम भी जल्द ही खतरे में होंगे।"~ रोजर टोरी पीटरसन

              "यह भयावह है कि पर्यावरण बचाने के लिए हमें अपनी ही सरकार से लड़ना पड़ता है।"~ एनसेल  एडम्स

              "हो सकता है आप मतदाताओं को बेवकूफ बना लें पर आप वातावरण को बेवकूफ नहीं बना सकते।"~ डोनेला मेडोज्

              ग्लोबल  वार्मिंग का दुष्परिणाम है दुनिया के सामने |
              पर्यावरण  की  रक्षा  सूत्र  होंगे  सबको   अपनाने||


              ग्लोबल  वार्मिंग  से  है  खतरे  में  जान |
              पर्यावरण  की  रक्षा  करना  सबकी  शान||


               ग्लोबल  वार्मिंग से खतरे है भरपूर |
                पर्यावरण  की  रक्षा  से  कर सकते है दूर||

               अगर रहेगा पृथ्वी का तापमान सामान्य |
                   तब  धरती  होगी  स्वर्ग  सामान ||

                जीवन  का  है  यह  अधिकार |
                  विश्व  रहे  सदा  हरियालीदार  ||

              हरियाली  से  है  जिसका  नाता |
                    सुख  समृद्धि  वह ही पाता ||

              धरती का बढ़ता तापमान रोकिये |
              धरती को सुरक्षित कीजिये ||

              धरती का तापमान बढ़ने से समुद्र का बढ़ेगा जल स्तर |
              कई शहर हो जायेंगे समुद्र के अंदर ||

              बेतहासा तापमान बढ़ना है खरतनाक |
              मानवता की रक्षा के लिए लगयिये रोक ||


              ऐसा डेवलपमेंट है बेकार |
              जिससे मानव जीवन को खतरे हो बरक़रार ||

              धरती का बढ़ता तापमान |
              धरती में घटता इंसान ||

              तापमान होगा नियंत्रित |
              धरती होगी संतुलित ||

              अंधाधुंध अयोद्योगिकी करण |
              दना – दन धरती का क्षरण ||

              धरती का बढ़ता तापमान रोकिये |
              CO2 कार्बनडाइऑक्साइड में शीघ्र रोक लगाईये ||

              विकसित राष्ट्र की कल्पना है बेकार
              प्रदुषण के लिए अयोद्योगिकीकरण है जिम्मेदार

              धरती को अगर हो बचाना |
              तापमान में शीघ्र लगाम होगी लगाना ||

              "मैं टैक्स का विरोधी हूँ , लेकिन मैं कार्बन टैक्स का समर्थन करता हूँ।"~ एलोन मस्क

              "यदि आप एक जंगल काट देते हैं , तो इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कितनी सॉमिल्स हैं अगर अब पेड़ ही नहीं बचे हैं।"~ सुजैन जॉर्ज

              "यदि मधुमक्खी पृथिवी के मुख से गायब हो गयी तो इंसानो के पास जीवित रहने के लिए बस चार साल बचेंगे।"~ मौरिस मेटरलिंक

              "एक देश जो अपनी मिटटी को नष्ट कर देता है वह खुद को नष्ट कर लेता है।  जंगल हमारी भूमि के फेफड़े हैं , वे हमारी हवा को शुद्ध करते हैं और लोगों को नयी ताकत देते हैं।"~ फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट

              "मैं खुश हूँ कि मैं ऐसे भविष्य में युवा नहीं होऊंगा जिसमे जंगल ना हों।"~ आल्डो लियोपोल्ड

              "वो जो मधुमक्खी के छत्ते के लिए ठीक नहीं है वो मधुमक्खी के लिए भी अच्छा नहीं हो सकता"~ मार्कस औरेलियस


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