Friday, July 31, 2020
मुंशी प्रेमचंद से संबंधित
Today is the birth anniversary of Munshi Premchand. Enjoy the unique literature of Munshi Premchand, just clicking👇
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Tuesday, July 28, 2020
Sunday, July 26, 2020
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Saturday, July 25, 2020
कारगिल विजय दिवस Quiz
Friday, July 24, 2020
Friday ,24 July 2020
कारगिल युद्ध भारतीय सेना के साहस और जांबाजी का ऐसा उदाहरण है जिस पर हर देशवासी को गर्व होना चाहिए| मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिए बसी रहेंगी|
Kargil Vijay Diwas Quiz
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कारगिल विजय दिवस:-
शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले
उरूजे कामयाबी पर कभी हिन्दोस्ताँ होगा,
रिहा सैयाद के हाथों से अपना आशियाँ होगा|
चखाएँगे मज़ा बर्बादिए गुलशन के गुलचीं को,
बहार आ जाएगी उस दम जब अपना बाग़बाँ होगा|
ये आए दिन की छेड़ अच्छी नहीं ऐ ख़ंजरे क़ातिल,
पता कब फ़ैसला उनके हमारे दरमियाँ होगा|
जुदा मत हो मेरे पहलू से ऐ दर्दे वतन हरगिज़,
न जाने बाद मुर्दन मैं कहाँ औ तू कहाँ होगा|
वतन की आबरू का पास देखें कौन करता है,
सुना है आज मक़तल में हमारा इम्तिहाँ होगा|
शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले,
वतन पर मरनेवालों का यही बाक़ी निशाँ होगा|
कभी वह दिन भी आएगा जब अपना राज देखेंगे,
जब अपनी ही ज़मीं होगी और अपना आसमाँ होगा|
रचनाकाल : 1916
जगदंबा प्रसाद मिश्र ‘हितैषी’

भारत ने 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध (Kargil War) में विजय हासिल की थी| कारगिल युद्ध में भारत की जीत के बाद से हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस (Kargil Vijay Diwas) मनाया जाता है| यह दिन कारगिल युद्ध में शहीद हुए जवानों के सम्मान हेतु मनाया जाता है|
कारगिल युद्ध, जिसे ऑपरेशन विजय के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई 1999 में कश्मीर के कारगिल जिले में हुए सशस्त्र संघर्ष का नाम है| कारगिल युद्ध (Kargil War) लगभग 60 दिनों तक चला और 26 जुलाई को उसका अंत हुआ| भारतीय सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाली जगहों पर हमला किया और धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से पाकिस्तान को सीमा पार वापिस जाने को मजबूर किया|
यह युद्ध ऊंचाई वाले इलाके पर हुआ और दोनों देशों की सेनाओं को लड़ने में काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा| पाकिस्तानी घुसपैठियों के खिलाफ सेना की ओर से की गई कार्रवाई में भारतीय सेना के 527 जवान शहीद हुए तो करीब 1363 घायल हुए थे| इस लड़ाई में पाकिस्तान के करीब तीन हजार सैनिक मारे गए थे, मगर पाकिस्तान मानता है कि उसके करीब 357 सैनिक ही मारे गए थे|
कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि : कारगिल युद्ध जो कारगिल संघर्ष के नाम से भी जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में मई के महीने में कश्मीर के कारगिल जिले से प्रारंभ हुआ था।
इस युद्ध का कारण था बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का लाइन ऑफ कंट्रोल यानी भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेह-लद्दाख को भारत से जोड़ने वाली सड़क का नियंत्रण हासिल कर सियाचिन-ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर कर हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिए खतरा पैदा करना।
पूरे दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध में भारतीय थलसेना व वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार न करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। स्वतंत्रता का अपना ही मूल्य होता है, जो वीरों के रक्त से चुकाया जाता है।
हिमालय से ऊँचा था साहस उनका : इस युद्ध में हमारे लगभग 527 से अधिक वीर योद्धा शहीद व 1300 से ज्यादा घायल हो गए, जिनमें से अधिकांश अपने जीवन के 30 वसंत भी नही देख पाए थे। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया, जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है।
इन रणबाँकुरों ने भी अपने परिजनों से वापस लौटकर आने का वादा किया था, जो उन्होंने निभाया भी, मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे, मगर लकड़ी के ताबूत में। उसी तिरंगे मे लिपटे हुए, जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने उठाई थी। जिस राष्ट्रध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुका होता था, वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था।
भारत के वीर सपूत :
कैप्टन विक्रम बत्रा: ‘ये दिल माँगे मोर’ - हिमाचलप्रदेश के छोटे से कस्बे पालमपुर के 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स के कैप्टन विक्रम बत्रा उन बहादुरों में से एक हैं, जिन्होंने एक के बाद एक कई सामरिक महत्व की चोटियों पर भीषण लड़ाई के बाद फतह हासिल की थी। यहाँ तक कि पाकिस्तानी लड़ाकों ने भी उनकी बहादुरी को सलाम किया था और उन्हें ‘शेरशाह’ के नाम से नवाजा था।
मोर्चे पर डटे इस बहादुर ने अकेले ही कई शत्रुओं को ढेर कर दिया। सामने से होती भीषण गोलीबारी में घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी डेल्टा टुकड़ी के साथ चोटी नं. 4875 पर हमला किया, मगर एक घायल साथी अधिकारी को युद्धक्षेत्र से निकालने के प्रयास में माँ भारती का लाड़ला विक्रम बत्रा 7 जुलाई की सुबह शहीद हो गया। अमर शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को अपने अदम्य साहस व बलिदान के लिए मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैनिक पुरस्कार ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
कैप्टन अनुज नायर : 17 जाट रेजिमेंट के बहादुर कैप्टन अनुज नायर टाइगर हिल्स सेक्टर की एक महत्वपूर्ण चोटी ‘वन पिंपल’ की लड़ाई में अपने 6 साथियों के शहीद होने के बाद भी मोर्चा सम्भाले रहे। गम्भीर रूप से घायल होने के बाद भी उन्होंने अकेले ही दुश्मनों से लोहा लिया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय सेना इस सामरिक चोटी पर भी वापस कब्जा करने में सफल रही। इस वीरता के लिए कैप्टन अनुज को मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े सैनिक सम्मान ‘महावीर चक्र’ से नवाजा गया।
मेजर पद्मपाणि आचार्य : राजपूताना राइफल्स के मेजर पद्मपाणि आचार्य भी कारगिल में दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए। उनके भाई भी द्रास सेक्टर में इस युद्ध में शामिल थे। उन्हें भी इस वीरता के लिए ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय : 1/11 गोरखा राइफल्स के लेफ्टिनेंट मनोज पांडेय की बहादुरी की इबारत आज भी बटालिक सेक्टर के ‘जुबार टॉप’ पर लिखी है। अपनी गोरखा पलटन लेकर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में ‘काली माता की जय’ के नारे के साथ उन्होंने दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए। अत्यंत दुर्गम क्षेत्र में लड़ते हुए मनोज पांडेय ने दुश्मनों के कई बंकर नष्ट कर दिए।
गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद मनोज अंतिम क्षण तक लड़ते रहे। भारतीय सेना की ‘साथी को पीछे ना छोडने की परम्परा’ का मरते दम तक पालन करने वाले मनोज पांडेय को उनके शौर्य व बलिदान के लिए मरणोपरांत ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।
कैप्टन सौरभ कालिया : भारतीय वायुसेना भी इस युद्ध में जौहर दिखाने में पीछे नहीं रही, टोलोलिंग की दुर्गम पहाडियों में छिपे घुसपैठियों पर हमला करते समय वायुसेना के कई बहादुर अधिकारी व अन्य रैंक भी इस लड़ाई में दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हुए। सबसे पहले कुर्बानी देने वालों में से थे कैप्टन सौरभ कालिया और उनकी पैट्रोलिंग पार्टी के जवान। घोर यातनाओं के बाद भी कैप्टन कालिया ने कोई भी जानकारी दुश्मनों को नहीं दी।
स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा : स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा का विमान भी दुश्मन गोलीबारी का शिकार हुआ। अजय का लड़ाकू विमान दुश्मन की गोलीबारी में नष्ट हो गया, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और पैराशूट से उतरते समय भी शत्रुओं पर गोलीबारी जारी रखी और लड़ते-लड़ते शहीद हो गए।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता : इस युद्ध में पाकिस्तान द्वारा युद्धबंदी बनाए गए। वीरता और बलिदान की यह फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। भारतीय सेना के विभिन्न रैंकों के लगभग 30,000 अधिकारी व जवानों ने ऑपरेशन विजय में भाग लिया।
यह युद्ध हाल के ऊँचाई पर लड़े जाने वाले विश्व के प्रमुख युद्धों में से एक है। सबसे बड़ी बात यह रही कि दोनों ही देश परमाणु हथियारों से संपन्न हैं। पर कोई भी युद्ध हथियारों के बल पर नहीं लड़ा जाता है, युद्ध लड़े जाते हैं साहस, बलिदान, राष्ट्रप्रेम व कर्त्तव्य की भावना से और हमारे भारत में इन जज्बों से भरे युवाओं की कोई कमी नहीं है।
जय हिन्द |
Friday, July 24, 2020
Thursday, July 23, 2020
Wednesday, July 22, 2020
MANODARPAN- PSYCHOLOGICAL SUPPORT FOR TEACHERS -STUDENTS
http://manodarpan.mhrd.gov.in/podcast.html
Learning Life Skills
- Become an Independent Learner
- Be positive
- Thank courageous corona Warriors
- Think of Innovative solutions
Monday, July 20, 2020
Saturday, July 18, 2020
Thursday, July 16, 2020
केंद्रीय विद्यालय प्रवेश प्रक्रिया
आवश्यक सूचना
सत्र 2020-21 के लिए केन्द्रीय विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया 20 जुलाई से शुरू हो रही है। कक्षा 1 में प्रवेश हेतु पंजीकरण 20/07/2020 से 07/08/2020 तक होंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन संपन्न होगी, जिसे आप साइट के या एंडरायड एप के माध्यम से भर सकते हैं। एडमिशन साइट के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक करें-
https://kvsonlineadmission.kvs.gov.in/
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कक्षा प्रथम के अलावा शेष कक्षाओं के प्रवेश रिक्तियों के आधार पर ऑफलाइन माध्यम से होंगे। इसके आवेदन 20 जुलाई से 25 जुलाई तक लिए जाएंगे (11वीं के अलावा)। इसके लिए विद्यालय पर संपर्क करें।
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प्रवेश तिथियों की जानकारी के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें https://kvsangathan.nic.in/sites/default/files/hq/KVS%20Admission%20Schedule%202020-2021.pdf
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प्रवेश संबंधी नियम व निर्देश हेतु ‘केवीएस प्रवेश नियमावली 2020-21’ के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें...
https://kvsangathan.nic.in/sites/default/files/hq/KVS%20Admission%20Guidelines%202020-2021_3.pdf
ऑनलाइन लिंक में 20 जुलाई से ही प्रवेश फॉर्म भरे जा सकेंगे।
Tuesday, July 14, 2020
Sunday, July 12, 2020
Wednesday, July 8, 2020
Tuesday, July 7, 2020
Saturday, July 4, 2020
Thursday, July 2, 2020
Alternative academic calender for primary
launched an 8-week Alternative Academic Calendar for the primary stage today.
This Calendar contains detailed guidelines for teachers on the use of technology & social media tools to impart education while the students are at home.
The Calendar further aims to empower our students, teachers, school principals & parents with positive ways to deal with #Covid19 via online teaching-learning resources and achieve the best possible learning outcomes.
Links:------
http://ncert.nic.in/aac.html
*** from the facebook wall of Dr. Ramesh Pokhariyal 'Nisank' Minister of HRD .,Govt. Of India
This Calendar contains detailed guidelines for teachers on the use of technology & social media tools to impart education while the students are at home.
The Calendar further aims to empower our students, teachers, school principals & parents with positive ways to deal with #Covid19 via online teaching-learning resources and achieve the best possible learning outcomes.
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Wednesday, July 1, 2020
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